राहत इंदौरी के इस ट्वीट ने जीता लाखों का दिल, जमकर हो रही तारीफ

राहत इंदौरी के इस ट्वीट ने जीता लाखों का दिल, जमकर हो रही तारीफ

इंदौर।आकाश धौलपुरे।

इंदौर को विश्व धरातल पर अपनी नज्मों और एक खासी शख्सियत के जरिये खास पहचान दिलाने वाले मशहूर शायर डॉ. राहत इंदौरी साहब ने एक ट्वीट के जरिये कोरोना की खिलाफत अपने जुदा अंदाज में की। डॉ. राहत इंदौरी ने ट्वीट किया है कि इंदौर में मरीज़ों को आइसोलेट करने के लिए अलग कमरों की ज़रूरत हो, तो उनका मकान हाज़िर है।

24 मार्च याने कल किये गए ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि खुदा ना करे, मुल्क में #COVIDー19 के मरीज़ों की तादाद ज़्यादा हो…लेकिन अगर हो जाए….और इंदौर में मरीज़ों को #isolate करने के लिए अलग कमरों की ज़रूरत हो, तो मेरा मकान हाज़िर है… 🙏@ChouhanShivraj@narendramodi
रब हम सबकी इस वबा से हिफाज़त करे….#StayAtHomeSaveLives

ट्वीट के जरिये डॉ. राहत इंदौरी ने इंदौर की रवायत को पेश किया और ऊपर वाले दुआ की कोरोना से ज्यादा लोग प्रभावित ना हो वही उन्होंने ट्वीट के जरिये लोगो से अपील की है लोग अपने घरों में रहकर अपना जीवन बचाये। राहत साहब के इस ट्वीट पर जमकर टैग किया जा रहा है और कमेंट्स के जरिये उनकी शख्सियत को सलाम किया जा रहा है।

खुदा ना करे, मुल्क में #COVIDー19 के मरीज़ों की तादाद ज़्यादा हो…लेकिन अगर हो जाए….और इंदौर में मरीज़ों को #isolate करने के लिए अलग कमरों की ज़रूरत हो, तो मेरा मकान हाज़िर है… 🙏@ChouhanShivraj@narendramodi
रब हम सबकी इस वबा से हिफाज़त करे….#StayAtHomeSaveLives

— Dr. Rahat Indori (@rahatindori) March 24, 2020

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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