
भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (MP) में एक और उपलब्धि हासिल कर ली है। दरअसल केंद्र और राज्य सरकार (Shivraj Government) द्वारा संचालित डेयरी और पशुपालन (dairy and animal husbandry) संबंधित योजनाओं पर मध्यप्रदेश ने बाजी मारते हुए पहला स्थान प्राप्त किया है। वही पशुपालन और डेयरी संबंधित योजनाओं में महिलाओं के साथ-साथ प्रदेश के युवा वे खुलकर दिलचस्पी ले रहे हैं।
दरअसल केंद्रीय नीति आयोग द्वारा राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission) के स्वरूप में बदलाव किया गया है। जिसके बाद मध्यप्रदेश में भारी बदलाव देखने को मिला। दरअसल प्रदेश में इससे पहले डेयरी और पशुपालन से संबंधित कई तरह की योजना संचालित होती थी। जिसे प्रदेश के युवा भ्रमित हो रहे थे। वही इन योजनाओं को एक स्वरूप देकर स्वरोजगार से जोड़ दिया गया। जिसके बाद नीति आयोग की इस योजनाओं की समीक्षा के बाद सभी योजनाओं को बंद कर दिया गया और 14 योजनाएं लागू कर दी।
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उनमें से कई योजनाओं में 50% कैपिटल सब्सिडी का भी प्रावधान किया गया। जिसके बाद पशुपालन और डेयरी विभाग योजनाओं को प्रदेश में लागू कर दिया। इसके लिए अब तक 1165 आवेदन आए। इसके लिए 745 दस्तावेज औपचारिकता पूरी करने के बाद सब्सिडी के लिए बैंकों को भेज दिए गए हैं। वही ऐसा करने के कारण मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गए हैं जबकि कर्नाटक दूसरा और तेलंगाना तीसरे नंबर पर शामिल है। बता दे कि मिशन द्वारा योजनाओं को दो तरह के विकल्प शामिल किए गए हैं।
जिसमें हितग्राही और उद्यमी को उद्यमी मित्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के बाद बैंक से 50 फीसद की कैपिटल सब्सिडी लोन उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए अनुदान राशि दो सामान किस्त में उपलब्ध कराई जाती है। इसके लिए पहले किश्त बैंक के लोन के उपलब्ध कराने के बाद परियोजना पूरी होने के बाद केंद्र सरकार द्वारा लोन देने वाले बैंक को उपलब्ध कराई जाती है।
इसके अलावा अनेक प्रावधान में स्व वित्त पोषण की भी व्यवस्था है। जिसमें हितग्राही को यूनिट के बुनियादी ढांचे की कुल लागत का 25% खर्च करना होता है जबकि 50 फीसद अनुदान राशि को छोड़कर अन्य से स्वागत के लिए 3 अनुसूचित बैंक से 3 साल की बैंक गारंटी देनी होती है। जिसके लिए श्योरिटी बॉन्ड भी आवश्यक है।
