ट्रेन की छत पर चढ़ा युवक हाई टेंशन लाइन की चपेट में आया, 80 प्रतिशत झुलसा

ट्रेन की छत पर चढ़ा युवक हाई टेंशन लाइन की चपेट में आया, 80 प्रतिशत झुलसा

इंदौर| आकाश धोलपुरे| इंदौर रेल्वे जंक्शन में आज उस वक्त अचानक अफरा तफरी का माहौल बन गया जब जीआरपी पुलिस को मानसिक रूप से विक्षिप्त एक युवक के हाई टेंशन लाइन के चपेट मे आने की सूचना मिली। घटना प्लेटफार्म नम्बर 2 की है ये जानकारी सामने आई है।

दरअसल, इन्दौर रेलवे एस्टेशन पर उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब एक युवक इन्दौर मुंबई जाने वाली ट्रेन की छत पर खड़ा हो गया और ट्रेन के ऊपर से जाने वाले हाई टेंशन लाइट को पकड़ लिया| काफी जद्दोजहद के बीच युवक को इन्दौर में ट्रेन से नीचे उतारा गया और फिर उसे इलाज के लिए हॉस्पिटल भेजा। घटना, इन्दौर रेल्वे स्टेशन के प्लेट फार्म नम्बर दो की है यहां खड़ी मुंबई इन्दौर चलने वाली ट्रेन की छत पर एक युवक चढ़ गया और उसने ट्रेन के ऊपर जाने वाली हाई टेंशन लाइन को पकड़ लिया। लाइन पकड़ने के बाद उसको काफी तेज करंट लगा लेकिन उसके बाद भी युवक नीचे नही उतर रहा था। जब इस बात की जनाकारी रेलवे स्टेशन पर तैनात जीआरपी पुलिस कर्मियों को लगी तो वह मौके पर पहुचे और उस समझाकर नीचे उतारा और इलाज के लिए एम.वाय.हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां उसकी हालत गम्भीर बनी हुई है।

घटना के बाद जब युवक को पुलिस कर्मी एम्बुलेंस तक लेकर निकले उस दौरान रेलवे एस्टेशन पर किस तरह की कोई व्यवस्था नही थी जिसके कारण युवक को ठेले पर डालकर पुलिस कर्मी 108 एम्बुलेंस तक लेकर पहुचे और फिर इलाज के लिए एम.वाय. हॉस्पिटल भेजा। जीआरपी थाना प्रभारी गायत्री सोनी की माने तो युवक मानसिक रूप से विक्षिप्त है और वह करंट के चलते 80 प्रतिशत तक जल चुका। फिलहाल, उसे इलाज के लिए अस्पताल भेजा जा चुका है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews