इंदौर में निकला नाग-नागिन का जोड़ा, रहवासियों में खौफ, देखिये वीडियो

इंदौर में निकला नाग-नागिन का जोड़ा, रहवासियों में खौफ, देखिये वीडियो

इंदौर| आकाश धोलपुरे| मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में वैसी ही कोरोना (Corona) का संकट मंडरा रहा है ऐसे में इंदौर के एक क्षेत्र में लोगो को कोरोना से नही बल्कि नाग नागिन के जोड़ो से डर लग रहा है। दरअसल, शहर के लसूड़िया क्षेत्र के तुलसी नगर कालोनी के रहवासी इसलिए भयभीत है क्योंकि वक्त – वेवक्त उनके घरों के आस पास नाग नागिन के जोड़े मंडरा रहे है।

बता दे कि आज भी तुलसी नगर में एक खाली प्लाट की झाड़ियों के बीच से निकले कई फीट लंबे 3 सांप आपस में मस्ती करते दिखे। नाग नागिन के जोड़ो की हरकतो को वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने मोबाइल के कैमरे में कैद कर लिया। रहवासियों का कहना कि लॉक डाउन के चलते हम सभी अपने घरों में है जिसके चलते क्षेत्र में सांप बाहर निकल रहे है और कई दफा तो वो लोगो के घरो की सीढ़ियों के नीचे भी आकर बैठ जाते है जिसके बाद रहवासी खौंफजदा है।

रहवासियों की माने तो उन्होंने कई बार निगम को भी शिकायत की है। क्योंकि खाली प्लाट पर घनी झाड़ियां हो गई है जिसकी वजह से सांप और जानवर उनमे छिपकर बैठ जाते हैं और लंबे समय से क्षेत्र मे सफाई भी नही हुई है जिसके चलते उन्हें ऐसी खतरनाक विपदा का सामना करना पड़ रहा है। रहवासियों के मुताबिक क्षेत्र में कई सांप के जोड़े है जिनके कारण उनका घर से किसी भी कारण निकलना मुश्किल हो गया है। फिलहाल, रहवासियों को इस मुश्किल से निगम कैसे निकाल पाता है ये अभी भी सवाल है क्योंकि लॉक डाउन का दौर है ऐसे में मूक प्राणियों को आजादी है इसलिए उन्होंने भी लोगो को कम्प्लीट लॉक डाउन में रहने पर मजबूर कर दिया है।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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