शरारती बंदर थाने के अंदर, पुलिस ने की ऐसी खातिरदारी, देखिये वीडियो

शरारती बंदर थाने के अंदर, पुलिस ने की ऐसी खातिरदारी, देखिये वीडियो

इंदौर/आकाश धोलपुरे

लॉक डाउन के चलते ना सिर्फ गरीब लोगों को पेट की आग से जूझना पड़ रहा है बल्कि मूकबधिर प्राणियों के लिए भी ये दौर मुश्किलो भरा है। दरअसल, जब से आम जनजीवन पर कोरोना की मार पड़ी है तब ही से जानवरों को भी खाने की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है। लॉक डाउन का असर ग्रामीण और घने वन क्षेत्रों में पड़ा है। पर्यटन समाप्त हो चुका है और क्षेत्र में खाद्यान्न न मिलने से मूक प्राणी बेहाल है। इसी के चलते कई जानवर मूक प्राणी भोजन कि तलाश में शहरो की ओर रूख कर रहे है।

इंदौर शहर के भंवरकुंआ थाने पर ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला जहां बड़ी संख्या में बंदर थाने में पहुंच गए। इन बंदरों को देख थाना स्टाफ ने इनके लिये खाने की सामग्री का इंतजाम किया। थाने का पूरा स्टाफ इन बंदरों की सेवा में जुट गया। ये बंदर बेहद भूखे और प्यास से बेहाल थे और पुलिसकर्मियों का प्रेम भी समझ गए। लिहाजा बिना किसी डर के इन्होने पुलिस के हाथ से पानी भी पिया और फल बिस्किट भी खाये। हालांकि आम तौर पर पुलिस थाने में आने वालों की खातिरदारी अलग अंदाज में करती है जिससे बहुत हद तक कई लोग वाकिफ भी होंगे लेकिन मेहमानों के रूप में कोरोना संकट के बीच जब बन्दर आये तो सभी ने उनका स्वागत आदर और सत्कार प्रकृति प्रेमी की ही तरह किया है। पुलिस थाने पर बंदरों की खातिरदारी का ये वीडियो अब जमकर वायरल हो रहा है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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