इंदौर पुलिस का एक्शन, डेढ़ लाख रुपये के अवैध पटाखे जब्त, दो दुकानदारों पर मामला दर्ज

जांच के दौरान दो अलग-अलग दुकानों पर बिना किसी अनुमति या लाइसेंस के अवैध रूप से पटाखे बेचे जाते हुए पकड़े गए। ​पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में बिना लाइसेंस के रखे गए पटाखे जब्त किए।
Indore police seized illegal firecrackers.

Indore police seized illegal firecrackers.

इंदौर शहर में दिवाली को देखते हुए सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस कमिश्नरेट द्वारा सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत बाणगंगा थाना पुलिस ने नंदबाग और कुशवाहा नगर क्षेत्र में औचक निरीक्षण कर बिना लाइसेंस के अवैध रूप से पटाखे बेच रहे दो दुकानदारों पर बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मौके से करीब डेढ़ लाख रुपए कीमत के अवैध पटाखे जब्त कर दोनों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा त्योहारी सीजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।​इसी कड़ी में बाणगंगा थाना पुलिस की टीमें लगातार अपने इलाकों में गश्त और संदिग्ध दुकानों की चेकिंग कर रही हैं।​निरीक्षण के दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर बिना वैध लाइसेंस के पटाखों का अवैध भंडारण और विक्रय किया जा रहा है।

पुलिस ने जब्त किये डेढ़ लाख रुपये के पटाखे 

पुलिस ने औचक कार्रवाई करते हुए नंदबाग और कुशवाहा नगर क्षेत्र की विभिन्न दुकानों की सघन जांच की। ​जांच के दौरान दो अलग-अलग दुकानों पर बिना किसी अनुमति या लाइसेंस के अवैध रूप से पटाखे बेचे जाते हुए पकड़े गए। ​पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में बिना लाइसेंस के रखे गए पटाखे जब्त किए, जिनकी स्थानीय बाजार में कुल अनुमानित कीमत करीब 1.5 लाख रुपए है।

आरोपी दुकानदारों पर मामला दर्ज 

पुलिस ने इस अवैध कारोबार में संलिप्त दोनों दुकानदारों को धरदबोचा। ​आरोपियों की पहचान राम यादव पिता जगदीश यादव और संदीप प्रजापति पिता विजेंद्र प्रजापति, दोनों निवासी नंदबाग, इंदौर के रूप में हुई है। ​बाणगंगा पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया है।

शकील अंसारी की रिपोर्ट 

Atul Saxena
लेखक के बारे में
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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